Home Breaking News मानव तस्करी: 20 घंटे काम करवाते थे, तीन दिन में दो बार देते थे खाना, जानिए ओमान लौटी तीन महिलाओं की दर्दभरी आपबीती

मानव तस्करी: 20 घंटे काम करवाते थे, तीन दिन में दो बार देते थे खाना, जानिए ओमान लौटी तीन महिलाओं की दर्दभरी आपबीती

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मानव तस्करी: 20 घंटे काम करवाते थे, तीन दिन में दो बार देते थे खाना, जानिए ओमान लौटी तीन महिलाओं की दर्दभरी आपबीती

कानपुर से दो और ओमान में फंसी उन्नाव की एक महिला रविवार सुबह मस्कट से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंची। पहले सभी को शनिवार देर रात आना था, लेकिन फ्लाइट लेट होने के कारण रविवार सुबह तीनों लखनऊ एयरपोर्ट पहुंच गए। परिजनों को देख तीनों महिलाएं फूट-फूट कर रोने लगीं। उन्होंने कहा कि वह किसी नर्क से कम नहीं हैं। आठ महीने में यातना के अलावा कुछ नहीं मिला।

वापस लौटी एक पीड़ित कानपुर के फूल वाली गली का रहने वाली है। उसने कहा कि उसका पति छोड़ के चला गया है। तीन बच्चों की जिम्मेदारी थी मुझ पर। उस समय मैं मुज़्ज़मिल से मिली र उसने ओमान में अच्छी नौकरी दिलाने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसे ही 50-60 हजार की नौकरी तो ऐसे ही मिल जायगी . उसके कहने पर पीड़िता मान गई और ओमान चली गई।

डीसीपी क्राइम की पहल पर ओमान से रिहा हो सकीं तीनों महिलाएं।
डीसीपी क्राइम की पहल पर ओमान से रिहा हो सकीं तीनों महिलाएं।

वीजा के खेल में फँसी
पीड़िता ने कहा कि उसे काम करने के बजाय टूरिस्ट वीजा पर भेजा गया था। वहां पहुंचने पर पर्यटक वीजा की अवधि समाप्त हो गई, जब उन्हें दोनों के बीच का अंतर पता चला, तब तक वह उनके जाल में फंस चुकी थी। एजेंसी संचालक ने उसका वर्किंग वीजा बनवाया और शेख के यंहा काम पर लगा दिया।

जीवन नरक जैसा था
पीड़िता ने बताया कि वंहा नर्क जैसा था। 20-20 घंटे काम करवाया गया। तीन दिन में दो बार खाना दिया जाता था। खाना भी बासी होता था। इतना ही नहीं शेख के नौकर हमेशा गलत काम करने के लिए तैयार रहते थे और दो-तीन बार कोशिश भी कर चुके थे। यदि कोई बीमार पड़ जाता था तो उसे दवा भी दी जाती थी जब वो मरणासन्न अवस्था मैं पहुँच जाता था।

ति चला गया, बच्चों को देनी थी अच्छी जिंदगी
जब कांशीराम कॉलोनी निवासी दूसरी पीड़िता भी अपने बेटों को गले लगाकर खूब रोती हुई एयरपोर्ट पर उतरी. उसने बताया कि पति की मौत के बाद उसके ऊपर तीन बेटों की जिम्मेदारी थी। स्थिति ऐसी थी कि बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं जा सकता था। तभी मैं मुज़्ज़मिल से मिली और ओमान में अच्छी नौकरी पाने के जाल में फँस गई । पीड़िता ने बताया कि वह पैसे कमाने और अपने बेटे को बिजनेस करवाने के लिए ओमान गई थी। उन्हें वीजा के खेल में भी फंसाया गया और फिर उन्हें झाड़ू पोछने, साफ सफाई करने के काम में लगा दिया गया। वापस आने की उम्मीद जगी तो शेख के नौकरों ने चार लाख रुपये मांगे, फिर बेटे से संपर्क किया और क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई.

आत्महत्या ही एकमात्र विकल्प बचा था। तीसरी उन्नाव निवासी अच्छे काम की तलाश में दिसंबर 2020 में ओमान गई थी। उन्होंने बताया कि वहां मिली यातनाओं में आत्महत्या ही आखिरी विकल्प था. ऐसा लग रहा था कि अब वह जिंदा घर नहीं पहुंच पाएगी। क्राइम ब्रांच की जानकारी मिलने के बाद उसने चुपके से फोन किया और सारी जानकारी अधिकारी को दी. उनके प्रयासों से अब हम किसी तरह वापस आने में सफल हुए हैं।

ओमान में अब भी फंसी हैं कानपुर-उन्नाव की 20 से ज्यादा महिलाएं
ओमान से भारत लौट रही महिलाओं ने बताया कि कानपुर उन्नाव की तीन ही नहीं बल्कि 20 से ज्यादा महिलाएं वहां फंसी हुई हैं. इसके अलावा यूपी, गोवा समेत कई राज्यों की सैकड़ों महिलाओं को वहां इसी तरह बंधक बनाया जा रहा है. तीनों के परिजनों ने क्राइम ब्रांच से संपर्क किया था। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद भारतीय दूतावास से संपर्क कर महिलाओं को ओमान से छुड़ाया। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि वहां फंसी और महिलाओं का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. अब तक छह महिलाओं को मुक्त कराया जा चुका है।

दो से मिलने वाले सभी के लिंक
अब तक क्राइम ब्रांच तीन महिलाओं को कानपुर और दो को उन्नाव से वापस ला चुकी है। इन सभी के संबंध जेल भेजे गए मुज्जामिल और अतीकुर रहमान से मिल रहे हैं। सभी पीड़ित इनके संपर्क में आने के बाद ही ओमान गए थे। क्राइम ब्रांच ने आरोपियो से पूछताछ के बाद बेंगलुरु से ऑपरेट करने वाले गिरोह के सरगना मोहम्मद अमीन को भी जेल भेज दिया है.

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