Home Breaking News अब धमनियों में सूजन के शिकार हो रहे हैं कोरोना संक्रमित, शोध में सामने आया, आंखों की रोशनी कम होने और ब्रेन हेमरेज की बढ़ी समस्या

अब धमनियों में सूजन के शिकार हो रहे हैं कोरोना संक्रमित, शोध में सामने आया, आंखों की रोशनी कम होने और ब्रेन हेमरेज की बढ़ी समस्या

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अब धमनियों में सूजन के शिकार हो रहे हैं कोरोना संक्रमित, शोध में सामने आया, आंखों की रोशनी कम होने और ब्रेन हेमरेज की बढ़ी समस्या

जो लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, वे अब धमनियों में सूजन और सख्त होने की समस्या से भी जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजों में खून के शरीर के दूसरे अंगों तक पहुंचने की प्रक्रिया में रुकावट आ रही है। इससे बीपी, शुगर, हार्ट अटैक और ब्रेन हैमरेज जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। एम्स पटना में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है. यह शोध 200 से अधिक कोरोना संक्रमितों पर किया गया है। अंतत: इनमें 69 ऐसे मरीज शामिल हुए, जिन्हें पहले से बीपी, शुगर, हृदय रोग, किडनी आदि से संबंधित कोई बीमारी नहीं थी।ये भी पढ़े:-भारत में कोरोना: आखिरी दिन 31023 नए मामले मिले और 401 की मौत; एक्टिव केस करीब 8 हजार घटे

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शोध में पाया गया है कि धमनियों में सूजन के कारण कम उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में इन बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। पहले इन बीमारियों के कारण मुख्य रूप से उम्र से जुड़े थे। शोध के बाद अब कोविड के बाद के प्रभाव में होने वाली बीमारियों का मुख्य कारण धमनियों में थक्का जमना और खून का गाढ़ा होना माना जा रहा है। एम्स पटना के इस शोध को एम्स दिल्ली समेत क्रिटिकल केयर यूनिट की प्रतिष्ठित पत्रिका में भी सराहा गया है।

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संक्रमित होने से पहले बीपी, शुगर और हृदय रोग से पीड़ित नहीं थे
एम्स के अनुसंधान दल के प्रभारी डॉ. नीरज कुमार ने बताया कि शोध में 18 वर्ष से 45 वर्ष तक के लोग शामिल थे, जिन्हें पहले से हाई बीपी, शुगर, हृदय रोग जैसी कोई बीमारी नहीं थी. संक्रमित होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज कराया गया।
ऐसे लोगों को तीन वर्गों में बांटा गया था। हल्के (आंशिक), मध्यम (कम गंभीर) और गंभीर (गंभीर) श्रेणी में। शोध में आंशिक श्रेणी में 28, मध्यम श्रेणी में 21 और गंभीर श्रेणी में 20 पीड़ितों को शामिल किया गया।

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शोध में दो बातें सामने आईं। पहला – संक्रमण जितना गंभीर होगा, उनकी धमनियों में उतनी ही अधिक सूजन और जकड़न होगी। दूसरा- हृदय रोग, बीपी, शुगर का कारण सिर्फ उम्र ही नहीं बल्कि कोविड भी है। यह जांच पेरिस्कोप नामक अत्याधुनिक मशीन के जरिए की गई। एम्स के निदेशक डॉ. प्रभात कुमार सिंह के निर्देशन में किया गया शोध डॉ. नीरज कुमार, डॉ. संजीव कुमार की टीम ने किया. टीम में डॉ अभ्युदय, डॉ अमरजीत, डॉ अजीत, डॉ कुणाल, डॉ वीना सिंह और डॉ दीवेंदु भूषण भी शामिल थे।

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शोध से इलाज होगा आसान
एम्स नई दिल्ली सहित सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने इस शोध की सराहना की है। इससे उन कोरोना संक्रमित लोगों के इलाज में काफी मदद मिलेगी जो अचानक हाई बीपी, शुगर, हृदय रोग, ब्रेन हैमरेज, सिरदर्द, आंखों की रोशनी कम होना आदि की समस्या से जूझ रहे हैं। धमनियों को ठीक करने के लिए कई दवाएं उपलब्ध हैं। इसके उचित उपयोग से अचानक आने वाली इन बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।

  • डॉ. नीरज कुमार, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और अनुसंधान दल के प्रभारी

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